तेरी मेहरबानियाँ

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तेरी मेहरबानियाँ

By |2018-07-09T00:06:08+00:00July 9th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|0 Comments

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* तेरी मेहरबानियाँ *

सिसकियां और हिचकियाँ
अब नहीं बेगानियाँ
तेरी मेहरबानियाँ

तेरी मेहरबानियाँ . . . . .

डर – डर के हवा चल रही
मद्धम हो रही चाँद की चाँदनी
हँस के लगती थी जो गले
डंसती है रात नागिन बनी

रूठने – मनाने का
रुक गया है कारोबार
बीच चौराहे बिखर गया
नवब्याही का शिंगार

टूट गया है रानीहार गले पड़ीं वीरानियाँ
तेरी मेहरबानियाँ

तेरी मेहरबानियाँ . . . . .

हंसना – हंसाना खेलना
ज्यों बहुत पुरानी बात है
खुली आँखों को नहीं पता
अब दिन है कि रात है

शूल बनकर चुभ रहीं नादानियाँ
तेरी मेहरबानियाँ

तेरी मेहरबानियाँ . . . . .

माघ – फागुन तप रहा
ठिठुरता है जेठ – आषाड़ अब
सुन्दर बनाई तस्वीर जो
अपने हाथों है ली बिगाड़ अब

तिनका – तिनका बीनकर
चिड़िया बनाएं घोंसले
हवा आसरा सांस का
हवा ही घरौंदे ले उड़े

नेकियों के भेस में बेईमानियाँ
तेरी मेहरबानियाँ

तेरी मेहरबानियाँ . . . . .

अपनी ख़बर हमको नहीं
दूर बहुत हम आ गए
भरी दुपहरी ज़िंदगी की
ग़मों के बादल छा गए

मधु के स्वाद को
माखियां किसी ने छेड़ दीं
बिन मल्लाहों किश्तियां
पानी में पानी ने घेर लीं

जाने वाले चले गए रह गईं निशानियाँ
तेरी मेहरबानियाँ

तेरी मेहरबानियाँ . . . . . !

( प्रस्तुत गीत मेरे ही एक पंजाबी गीत का हिंदी रूप है । )

वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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