सपना

सपना

By |2018-07-09T16:51:53+00:00July 9th, 2018|Categories: कविता|0 Comments

🕉

* सपना *

पानी – पूरी चाट – पकौड़ी उसने खाई
मैंने केवल दही – भल्ले का स्वाद चखा

उसका मुखमंडल सम्पूर्ण संतुष्टि
मेरे होंठों हल्की – सी हास्य – रेखा

बाद में गए हनुमानजी के मंदिर
रंगीन नवीन चलचित्र पहले देखा

प्रसाद के दोने हाथों में लिए घर को चले
बोली, क्या होगा दीदी को यदि चला पता

तेरे चोटी है तू सोच
मेरा क्या ? मैंने तो मात्र सपना देखा

वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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