वजह (ग़ज़ल)

वजह (ग़ज़ल)

यूँ ही नहीं कोई गिरता किसी की निगाहों से ,

निगाहों से गिरने की कोई वजह होती है.

नफरत भी कोई यूँ ही नहीं करता किसी से ,

इस नफरत की भी कोई वजह् होती है.

सागर में तूफ़ान का आना बेवजह नहीं होता,

और नदियों के मचलने की  वजह होती है.

यूँ ही धुंया भी नहीं उठता दिल से आह बनकर,

किसी रकीब ने सुकून में आग लगाई होती है.

मगर यह दिल के फसाने कौन समझे ”अनु” ,

के शिकायत करने की भी  वजह होती है.

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संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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