राधा के पैरों के निशान

राधा के पैरों के निशान

By |2018-07-11T22:08:24+00:00July 11th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , |0 Comments

🕉

* राधा के पैरों के निशान *

जो चाँद – तारे न रहे
हवा भी इक दिन रुक गई
खो जाएंगे तब दिन और रात
जो भी होंगे उस घड़ी
तेरा नाम लेंगे मेरे नाम के साथ

जो चाँद – तारे न रहे . . . . .

जो कभी वक्त पत्थर हो गया
दरख़्त ऊँचे – लम्बे और घने
रहेंगे पंछियों के बिना
इक तेरा दिल इक मेरा दिल
फिर भी रहेंगे साथ – साथ

जो चाँद – तारे न रहे . . . . .

उलझनों – पहेलियों का मारा हुआ
जो कहीं मैं रुक गया
कहेंगे लोग जाने क्या और क्या
घड़ी सलोनी के समय
बैठेंगे जुड़ – जुड़कर के साथ

जो चाँद – तारे न रहे . . . . .

न चाँद की तू चाँदनी
न फूलों जैसा तेरा रूप है
घड़ी – पलों में दोनों पकड़ेंगे राह
तेरी सुगंध उष्मिल – छुअन
मेरी सांसों में रहेंगे सदा – सदा

जो चाँद – तारे न रहे . . . . .

गंगा – स्नान करेंगे
एक ही कलश में बैठकर
जीवन – ताप सब होंगे विदा
राधा के पैरों के निशान
ढूंढेंगे लोग आसपास

जो चाँद – तारे न रहे . . . . . !

वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

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