वो बहाना छोड़ दे

गजल…

कोई उनसे कह दे हमको आजमाना छोड़ दे
इस तरह से प्यार मे हमको सताना छोड़ दे !

अर्जमन्दी ने मेरी उनको बना जीवन लिया
मेरी उल्फत को अजल करना मिटाना छोड़ दे!!

हंस रहा सारा जमाना कर रहा रुशवाइयाँ
इस कदर इश्क़ का तमाशा बनाना छोड़ दे!

खाम है सब फल अभी पत्थर शजर पर मारते
है अभी मौसम नही नजरे लगाना छोड़ दे !!

दाग से खाली नही रूखसार उनका भी कही
कोई उनसे कह दे अब शीशा दिखाना छोड़ दे !

रास्ते मे रोज छुप छुप कर उन्हें देखा किए
अब नही मिलता समय का वो बहाना छोड़ दे!!
मनोज उपाध्याय मतिहीन

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मतिहीन

मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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