गजल…

खयाल मन मे बुरा आए तो टालते रहिए
इस तरह गुबार दिल के निकालते रहिए !

सजग रहे भी कि कोई न घात कर बैठे
नसों में खून भी अपने उबालते रहिए !!

नेक नीयत को जमाने ने दर्द ही बख्शा
गम जो आ गिरे झोली मे उछालते रहिए !

कही सूख न जाए ये मुहब्बत के सजर
जड़ों मे इनके जरा पानी डालते रहिए !!

हरेक चीज मे मिलावटों का दौर है ये
आँखें चलनी बना लीजे चालते रहिए !

जो उठाता है बोझ उस पे लादते है सभी
जहां तक हो सके मतिहीन संभालते रहिए !!

– मनोजउपाध्याय मतिहीन…

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