संभालते रहिए…

संभालते रहिए…

By |2018-07-11T22:02:15+00:00July 11th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , |0 Comments

गजल…

खयाल मन मे बुरा आए तो टालते रहिए
इस तरह गुबार दिल के निकालते रहिए !

सजग रहे भी कि कोई न घात कर बैठे
नसों में खून भी अपने उबालते रहिए !!

नेक नीयत को जमाने ने दर्द ही बख्शा
गम जो आ गिरे झोली मे उछालते रहिए !

कही सूख न जाए ये मुहब्बत के सजर
जड़ों मे इनके जरा पानी डालते रहिए !!

हरेक चीज मे मिलावटों का दौर है ये
आँखें चलनी बना लीजे चालते रहिए !

जो उठाता है बोझ उस पे लादते है सभी
जहां तक हो सके मतिहीन संभालते रहिए !!

– मनोजउपाध्याय मतिहीन…

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मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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