कविता..

मुझे दी खबर मेरे मरने की
मेरे यार ने जब ये कहा

तुम हो कहां इस जहाँन में
तुम्हे दफन करके हम आ गये |

पर हो सका न मझे यकीं
मेरी मौत मुझको पता नही !!

कब हो गया ये हादसा
मेरी इसमें क्या कुछ है खता !

नही मेरी इसमें खता नही
मेरी मौत मुझको पता नही !!

क्या विचार मेरे मर गये
या हम नजर से उतर गये !

संवेदना ही रही न जब
तब क्या कहे कि किधर गये !!

हर सांस में ठहराव है
कोई टीस है कोई घाव है |

फिर जिन्दगी क्यों जता रही
मेरी मौत मुझको पता नही !!

है हाथ पर न ये उठ रहे
और पांव भी तो न चल रहे !

हम क्यों हमी में उबल रहे
क्या मुझमें ना संबल रहे !!

कुछ मौन आहट आ रही
क्या कह रही क्यों सता रही !

वह कुछ तो मुझे बता रही
मेरी मौत मुझको पता नही !!

– मनोज उपाध्याय मतिहीन…

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