लोग तो कहते है

लोग तो कहते है

लोग तो कहते है

की ये शीशे सा दिल पत्थर से टूटता है

पर जिसने मेरा दिल तोड़ा, वो तो फूल से थे

 

ये दुनिया गैर जरूरी सा था

हम उन्हें इतना ज़रूरी समझते थे

पर अब समझ आया की, उनके लिए तो हम फ़िज़ूल से थे

 

की कोई कैसे कहता है

की प्यार का डिसीजन बड़ा सिरियस होता है

उनके लिए तो ये उल – जुलूल से थे

 

हम खुद को प्यार में अँधा समझते रहे

पर अब समझ आया की, उनका प्यार तो मेरी आँखों में धुल से थे

 

तू क्यों उनके बिछड़ने की मज़बूरी ढूढता है जेपी

अरे दिल तोड़ना तो उनके उसूल से थे

 

– जयप्रकाश अद्वितीय

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About the Author:

मै जयप्रकाश अद्वितीय, मेरे माता-पिता मीरामेश्वर (मीरा एवं रामेश्वर)। मुझे जीवन की परिस्थिति को समझना तथा उस पर लिखना मुझे बेहद पसंद है। और पढ़ने का प्यास है। मुझसे संपर्क मेरे E-mail jayprakashadvitiyajp@gmail.com पर कर सकते है। धन्यवाद

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