त्रिभंगी छंद की कविता “कुछ बातें”

भेदी दीवारें,मानव हारें,बेतुक नारे,दुख भरते।
जीवन में ख़ारा,मन हो भारा,तनाव लारा,हम डरते।
राजनीति भारी,तम-सी कारी,घटिया सारी,क्यों करते।
शुभ मिसाल बनना,गुण ले तनना,सीधा चलना,मन हरते।

आपस का लड़ना,यूँ ही चिढ़ना,गलती करना,दुख देता।
मुख सौहे हँसना,दिल में बसना,मीठा कहना,सुख देता।
आपस का मिलना,दोस्ती निभना,अच्छे रहना,शुभ होता।
कष्टों का मिटना,वैरी हटना,आगे बढ़ना,दुख खोता।

राजनीति छोड़ो,प्रदेश जोड़ो,आगे दौड़ो,विकास हो।
ग़रीब जो बढ़ता,चोटी चढ़ता,मोती जड़ता,प्रकाश हो।
घटिया पन हारे,बढ़िया धारे,लगते प्यारे,हम सारे।
शुभ सच्ची बातें,लम्बी रातें,घटती घातें,सम तारे।

सम गिरगिट बनना,धोखा देना,मौका लेना,छोड़ो जी।
सच सदैव बोलो,मिस्री घोलो,समता तोलो,जोड़ो जी।
ना चुगली करना,आँसू हरना,प्रेमी बनना,दौड़ो जी।
बस दुश्मन बदले,सच ना बदले,सुनले पगले,थौड़ो जी।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
———————————–

Say something
Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...