क्यों क्रूर है बरिबंड है…

मुक्तक…

उदन्त मार्तण्ड है ज्वलंत क्यों पाखंड है

क्या उष्णता पाखंड की रवि ताप से प्रचंड है  !

 

कथन विलग है कृत्य से मुख मे सभी के राम है

मिथ्या मगर हर बात है अंतर से सब उदंड है  !!

 

क्यों हास हो रहा जठर क्या विधाता वाम है

संस्कृतियाँ प्रवृत्तियां सुना यहाँ अखण्ड है  !

 

मतिहीन है क्यों दीन है वैचार – मृत्यु प्राप्त है

क्यों सत्य से अति दूर है क्यों क्रुर है बरिबंड है  !!

 

मनोज उपाध्याय मतिहीन…

 

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मतिहीन

मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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