पूर्ण विजय हो…

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पूर्ण विजय हो…

By |2018-07-12T20:45:34+00:00July 12th, 2018|Categories: कविता|0 Comments

 

जीवन सरल सरस निर्भय हो
सब अनुकुल अतुल सदय हो !

हम चाहे जैसे भी हो पर
कोई कही नही निर्दय हो !!

यह कामना है यही पीपासा
जैसे हो पूरी अभिलाषा !

चाहे शशि अम्बर तज भागे
चाहे भानु ना कभी उदय हो !!

रे मूरख मन कब जागेगा
इस जड़ता को कब त्यागेगा !

धरा फटे या व्योम गिर जाए
या वसुधा पर घोर प्रलय हो !!

हम चाहे तो वायु चले और
हम चाहे तो पल रुक जाए !

ऐसा हो सब चरण मे लोटे
मेरे आगे यम झुक जाए !!

मुट्ठी मे हो समय हमारे
यह चाहे नर विकल हृदय हो !

सकल विश्व हो दाश हमारा
लक्ष्य सकल हो पूर्ण विजय हो !!

-मनोज उपाध्याय मतिहीन

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मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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