रिश्तों का अतिक्रमण

रिश्तों का अतिक्रमण


रिश्तों का अतिक्रमण _____
कई बार जाने अनजाने में हम अपनी सीमाओं को पार कर जाते हैं, हालांकि यह हमारा उद्देश्य नहीं होता। मुझे आज भी याद है, मेरी मित्र की नई नई शादी हुई थी,और उसको रसोई में कुछ खास बनाना नहीं आता था। उसकी जिठानी शुरू शुरू में उसकी सहायता कर देती थी। लेकिन धीरे धीरे मेरी मित्र को दरकिनार कर, जिठानी सारी कमान अपने हाथ में संभाल, स्वयं ही मेरी मित्र के पति पर अधिकार जताने लगी, कभी मित्र के पति के पसंद की सब्जी, कभी कोई डिश, यहां तक कि सुबह की चाय, कपड़े वगैरह भी देने लगी। मेरी मित्र सुलझे विचारों की थी, जो उसे समझ गया, और स्थति बिगड़ने से पूर्व ही उसने संभाल ली। इस वाकये में गलती चाहे किसी की भी नहीं थी, फिर भी अतिक्रमण हो रहा था। वो जिठानी शुरू में ही मेरी मित्र को समझाती, सिखाती तो शायद अच्छा रहता।
पति पत्नी के बीच, एक और सबसे अजीज अतिक्रमण, मेरी मां______यह एक ऐसा जुमला है, जिस बहस में कोई गुंजाइश नहीं, दोनों के अपने 2 श्रेष्ठता के मानक हैं। या तो जो अच्छा है,उसे स्वीकारें, नहीं तो ऐसी बातों को टच ही ना किया जाए। सच कड़वा तो होता ही है, निगला नहीं जाता। करना, धरना कुछ नहीं, अहम की कसक…….इगो से बचें।
आजकल एक और अतिक्रमण है, समय का। आपका मन नहीं लग रहा, बस उठाया मोबाइल, घुमाया नंबर, और शुरू। फोन में घुस कर झांकने, पकड़ बनाने की आदत, न ये देखा कि अगले के पास समय है या नहीं, उसके अपने काम होंगे, हो सकता है वो हिचकता हो, संयम बरतिये।
#एक और किस्सा देखिए, हमारे पड़ोस में एक परिवार में सास, बहू रहती हैं। दूसरे पड़ोस में रहने वाली सुषमा गाहे बगाहे, सास बहू के घर में आकर कभी सास के लिए चाय बना लाती, कभी पैरों में तेल लगाने बैठ जाती, और गप्पें, शुरू। सुमन के जाने बाद सास अपनी बहू को अक्सर ताने देती। अरे देखो! सुमन को, मेरे पैर दबाती है, तेल लगाती है, इतनी अच्छी है, उतनी अच्छी है, आदि…… आदि। कुछ दिन तो बहू ने सुना, बाद में उसने जवाब दे दिया, मांजी, अगर आप इजाजत दें, तो मैं भी ऐसी ही अच्छी बन सकती हूं, दूसरों के घर जाकर कुछ समय के लिए बड़प्पन लेना बहुत आसान है, रोज वालों को साथ लेकर निभाना कठिन है।
#मित्रता में भी #हक जताने के साथ, अपनी सीमाओं का उल्लंघन ना होने पाए, इस बात का हमेशा ध्यान रखें। अन्यथा दूरी बनते देर नहीं लगती।
#कई बार आप ने आंटियों को भी दूसरे बच्चों को बहला फुसला कर काम करवाते देखा होगा। उधर अपने बच्चों को ताना मारेंगी, देखो इस बच्चे को!!! मुझे मां की तरह मानता है, एक तुम हो। अब इन मांओं को कौन समझाए, कि बाहरी बेटों को केवल बातें बनानी हैं, और आपके बेटे को जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से निभाना है। इसलिए अपनी सीमाओं को पहचाने, रिश्तों में अनावश्यक अतिक्रमण से बचें। आपके द्वारा किए गए अनावश्यक #अतिक्रमण से दूसरे के घर की शांति भंग हो सकती है। रिश्तों की डोर बेहद नाजुक, नरम, होती हैं। उन्हें उलझने, टूटने से बचाईए।अतिक्रमण रिश्तों का हो या जगह पर,दरकते (टूटते) देर नहीं लगेगी।

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