बहर-फ़ाइलातुन मुफ़ाईलुन फ़ेलुन

2122 1212 22


              ग़ज़ल
आपकी याद इस तरह आई।
ये हवा ज्यों गुलाब छू आई।।

रातभर सोचता रहूँ ना मैं।
आँख सपना तिरा सज़ा लाई।।

दूरियाँ-दूरियाँ नहीं होती।
चाहतें जब बने न हरजाई।।

हम सदा मिल रहें यही चाहा।
दो दिलों को मिले न तन्हाई।।

आ मिलें हम गले करें वादा।
हो न दिल में कभी ज़रा खाई।।

प्रीत सजके मिटे नहीं प्रीतम।
ज्यों तनों से हटे न परछाई।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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