इससे पहले की ये ज़िन्दगी

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इससे पहले की ये ज़िन्दगी

By |2018-07-16T21:53:43+00:00July 16th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |1 Comment

तु चल रहा तो थम के चल

तू दौड़ता क्यों थम ज़रा

इससे पहले की कहीं ठहर जाये ये जिंदगी

 

तुझे पाना क्या है,

जो तुम खुद को खो रहे

तुम खुद दुखों को खोजकर

क्यों खुद ही दुखी हो रहे

तुझे सोच से ज्यादा मिलेगा

बस खुद से कभी तु मिल ज़रा

इससे पहले की कहीं बिछड़ जाये ये ज़िन्दगी

 

पल – पल तुम रो रहे हो

कभी हंसने की चाह में

छोड़ दो ना क्या रखा है

इस अनचाही राह में

हँस लो जी भर के आज तुम

कल की फ़िकर में क्यों पड़ा

इससे पहले की दुखों से भर जाये ये ज़िन्दगी

 

तू चल रहा तो थम के चल

तू दौड़ता क्यों थम ज़रा

इससे पहले की कहीं ठहर जाये ये ज़िन्दगी

 

     – जयप्रकाश अद्वितीय

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About the Author:

मै जयप्रकाश अद्वितीय, मेरे माता-पिता मीरामेश्वर (मीरा एवं रामेश्वर)। मुझे जीवन की परिस्थिति को समझना तथा उस पर लिखना मुझे बेहद पसंद है। और पढ़ने का प्यास है। मुझसे संपर्क मेरे E-mail jayprakashadvitiyajp@gmail.com पर कर सकते है। धन्यवाद

One Comment

  1. Jay Prakash Advitiya July 19, 2018 at 1:55 pm

    आप सभी का धन्यवाद
    मुझे समझने के लिए।

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