तु चल रहा तो थम के चल

तू दौड़ता क्यों थम ज़रा

इससे पहले की कहीं ठहर जाये ये जिंदगी

 

तुझे पाना क्या है,

जो तुम खुद को खो रहे

तुम खुद दुखों को खोजकर

क्यों खुद ही दुखी हो रहे

तुझे सोच से ज्यादा मिलेगा

बस खुद से कभी तु मिल ज़रा

इससे पहले की कहीं बिछड़ जाये ये ज़िन्दगी

 

पल – पल तुम रो रहे हो

कभी हंसने की चाह में

छोड़ दो ना क्या रखा है

इस अनचाही राह में

हँस लो जी भर के आज तुम

कल की फ़िकर में क्यों पड़ा

इससे पहले की दुखों से भर जाये ये ज़िन्दगी

 

तू चल रहा तो थम के चल

तू दौड़ता क्यों थम ज़रा

इससे पहले की कहीं ठहर जाये ये ज़िन्दगी

 

     – जयप्रकाश अद्वितीय

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