नाराजगी

नाराजगी

By |2018-07-16T01:34:43+00:00July 16th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

नाराजगी
………….
नाराजगी नहीं कोई कन्हाई तुमसे,
बस थोड़ी सी ही मेरी शिकायत है ।
आ जाया करो कभी कभी कान्हा,
बस इतनी सी ही मेरी गुज़ारिश है ।
तेरी वंशी की धुन सुने जमाना बीता,
छेड़ो कोई मधुर धुन यही चाहत है।
फिर महक उठे बगिया वृन्दावन की,
सारे खग मृग की नजरें तुम पर हैं ।
कालिया फुफकार रहा होके निडर,
देखो कान्हा लोग कितने आहत हैं।
कंस डोले इधर उधर क्रूर अहंकारी,
आज फिर जग को तेरी जरूरत है ।
नाराजगी नहीं कोई कन्हाई तुमसे ,
बस थोड़ी सी ही मेरी शिकायत है ।
आये थे दौड़े चीर थी बढ़ाई कृष्ण,
आज तो पग पग पर दुःशासन हैं।
आज भी कृष्णा खड़ी पुकार रही,
आज उन्हें तेरी ही तो जरूरत है ।

डॉ.सरला सिंह

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शिक्षण कार्य टी.जी.टी.हिन्दी खाली समय में लेखन कार्य।

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