व्यक्ति से बड़ा देश है

जानो सारे बात यह,बड़ा व्यक्ति से देश।

अहं भाव को छोड़ दो,यही सर्व आदेश।।

यही सर्व आदेश,फूले-फलेंगे सारे।

देश प्रेम के साथ,गुँजेंगे जब भी नारे।

रहना है आज़ाद,देश प्रेमी बन मानो।

साख आपकी देश,देश से खुद को जानो।

 

राजा कमज़ोर तो,हम भी हैं कमज़ोर।

चमन नहीं तो फूल का,चले नहीं है ज़ोर।।

चले नहीं है ज़ोर,ताक़त है बंद मुट्ठी।

रहने दो निज स्वार्थ,करो इसकी तुम छुट्टी।

रोशन करता सूर्य,तारे चाँद से ताज़ा।

प्रजा सुखी है आप,शक्तिशाली जब राजा।

 

भरना गागर आप का,सही नहीं है सीख।

सबकी बुझती प्यास जब,दूर रहेगी भीख।।

दूर रहेगी भीख,होंगे सब शक्तिशाली।

पाए तब ही देश,खुद की सही खुशहाली।

करो गौर यह बात,भवसागर अगर तरना।

सबको दो अधिकार,छोड़ो खुदी का भरना।

 

सैनिक मरते देश पर,खुद को सदैव भूल।

ख़ुशबू सबको बाँटते,खिलके देखो फूल।।

खिलके देखो फूल,भूलता क्यों यह मानव।

अपने सुख के हेतु,बनता फिरे है दानव।

सेवा करना प्यार,बनाओ आदत दैनिक।

सरहद पर सब भूल,रक्षा करें ज्यों सैनिक।

   -राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”

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