फिर भी जगमगाता हूँ…

फिर भी जगमगाता हूँ…

By |2018-07-15T21:06:57+00:00July 15th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|0 Comments

फिर भी जगमगाता हूँ…

समेटता हूँ बिखरते ख्वाब को सजाता हूँ
रोज तकदीर को लिखता हूँ और मिटाता हूँ |

जो मद में चूर हो भूले है अपने ओहदे को
आईना देकर उन्हे उनकी जगह दिखाता हूँ ||

हवा हूँ मैं खुला ये आसमा वतन है मेरा
घरौदें फिर भी रोज रेत का बनाता हूँ |

मै आसमां का एक टूटा हुआ सितारा हूँ
वजूद कुछ भी नही है फिर भी जगमगाता हूँ ||

मनोज उपाध्याय मतिहीन

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मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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