खनक

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खनक

By |2018-07-15T21:06:07+00:00July 15th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

रूमाल की गांठ में बंधी
चवन्नी,अठन्नी,पंजी,दंसियां
ऊंगलियों की छुअन से ही
पता चल जाती थी
वैसे ही दिल के रूमाल
की गांठो मे तेरी यादों
के लम्हो के सिक्के
आज भी योगी हल्की-सी
छेडखानी से खनक जातें हैँ

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