मुझको गंम मे मुस्कुराना आ गया…

मुझको गंम मे मुस्कुराना आ गया…

By |2018-07-16T01:37:27+00:00July 16th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , |0 Comments

गजल…

मुझको गम मे मुस्कराना आ गया

वज्न- 2122 2122 212

 

मुझको गम मे मुस्कराना आ गया
जख्मों को दिल में छुपाना आ गया !

काम ना आई बफा तो क्या हुआ
बेवफाओं को भूलाना आ गया !!

इश्क मे खाये है धोके इस कदर
अश्क पीने का बहाना आ गया !

हसते देखा जब कभी मुझको कोई
लोग कहते है दीवाना आ गया !!

सच मे सदाकत का अब रुतबा नही
तौबा तौबा क्या जमाना आ गया !

तुम नही आए निगाहें थक गयी
क्या तुम्हें हमको बनाना आ गया !!

चल रहे थे हम अकेले राह मे
रास्ते मे इक वीराना आ गया !

अब नही बढते कदम मतिहीन के
लग रहा मेरा ठीकाना आ गया !!

       –  मनोज उपाध्याय मतिहीन
      

अर्कान- फाइलातुन फाइलातुन
फाइलून
काफिया-आना
रदीफ-आ गया…
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मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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