कविता

आज मन करता है।
किसी के ख्वाब का शाहज़ादा बन जाएं।
आज मन करता है किसी के लबों के हँसी बन जाएं।
आज मन करता है किसी के ख्यालों में खो जाएं।
आज मन करता है किसी के गमों में सरीख हो जाएं।
आज मन करता है किसी के ज़िन्दगी में खो जाएं।

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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