मन की बात

मन की बात

By |2018-07-19T21:30:59+00:00July 19th, 2018|Categories: कविता|0 Comments

कभी चंचल कोमल
मन कभी गहन चिंतन में लिप्त
कभी अनंत गहराइओ में खोया
कभी पक्षी समान भरे उड़ान
मन की बाते
आँखो की भाषा
कुछ नयी अभिलाषा
मन पल में अनंत गहराइयां छू जाये
मन पल में विचलित पल में स्थिर हो जाये
मन की बाते जानना बहुत जटिल
मन है समुन्दर सा गहरा
मन नदी सा निश्छल
पल में शांत पल में उद्वेग
मन की बाते मन ही जाने
मन को समझना बहुत जटिल
शालिनी जैन

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