कविता

मै एक मात्र पेड़ हूँ!!

मैं आपको दूषित हवाएं से बचाते आया हूँ!!

मैं आपको शुद्ध हवाएं प्रदान करते आया हूँ!!

मैं आपको वर्षों से फ़लों से पेट भरते आया हूँ!!

मैं आपकी अपनी छाया देते आया हूँ!!

मैं तो मात्र एक पेड़ हूँ!!

मेरे बिना आप सब इंसानों का जीवन नष्ट है!!

मेरे बिना आपका संकट आना तय है!!

मेरे बिना सूखा, शुद्ध हवाएं सब विनाश हो जाएंगे!!

मैं आपलोग के भग्यरेखा के सामान्य हूँ!!

मैं तो मात्र एक पेड़ हूँ!!

मैं धरती का आँख का तारा हूँ!!

मैं धरती का सिंगार हूँ!!

मैं धरती का आत्मा हूँ!!

मैं धरती को अपने जड़ों से बचता आय हूँ!!

मैं एक मात्र पेड़ हूँ!!

मैं सदैव आपकी हिट ही चाहते हैं!!

हमसब पेड़ आपलोग की ख़ातिर जीवन जीते आया हूँ!!

फिर मुझे आपलोग काटते क्यों जा रहे हैं!!

हमलोग के जीवन पर आप सभी मनुष्यों का ख़तरा मंडरा रहा है!!

मैं एक मात्र पेड़ हूँ!!

हमरा अस्तित्व मिटा तो आप मनुष्य जाति का विलुप्त होने तय है!!

मैं आपका भग्यरेखा के सामान्य हूँ!!

मैं तो सिर्फ मात्र एक पेड़ हूँ!

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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