*गजल*

*क्या हो गया है क्यों रो रहा है…*

यूं हौसले तू क्यों खो रहा है
क्या हो गया है क्यों रो रहा है !

तू दाग दिल के सूरज बना ले 2
क्यूं दाग दामन से धो रहा है !!

क्या हो गया है क्यों रो रहा है…
यूं हौसले तू क्यों खो रहा है !

है दूर मंजिल तेरा मुसाफिर
क्यों देर तक अब तू सो रहा है !

जो बोएगा पाएगा वही तू
क्यों पग मे कांटे तू बो रहा है !!

है खेल सारा ये किस्मतों का
मिला नसीबों मे जो रहा है !

है थोड़ी हैरत हमे भी मतिहीन
जो गैर लाजिम क्यों हो रहा है !!

क्या हो गया है क्यों रो रहा है…
यूं हौसले तू क्यों खो रहा है !!!

*मनोज उपाध्याय मतिहीन*

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