एक सितारा टूट गया…

कविकुल के गंगा आकाश से एक सितारा टूट गया
शोकाकुल उपवन जैसे परिजात ही सारा टूट गया !

शोक व्याप्त संतप्त दृगों से अविरल धारा बहती है
युगों युगों से रहा हमारा नीरज प्यारा रूठ गया !!

अगणित पुष्प प्रफुल्लित कुसुमित नवांकुरो से भरी मही
एक सुमन काल कवलित हो गया हमारा टूट गया !

आज लहर उन्माद भरी क्यों सिंधु हृदय प्राकम्पित है
संसृत सागर धीरज छोड़ा एक किनारा टूट गया !!

मनोज उपाध्याय मतिहीन

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