कैसे लक्ष्य सफल होगा (प्रेरणा)…

फूलों से आकर्षित करना
बिन बोले बिन समझाये !

खुश्बू बिना किसी शर्त ही
हम तक अपनी पहुँचाए !!

इन फूलों को तोड॒ मनुज
निज स्वार्थ हेतु ले जाता !

और कही देवालय में
बिन भाव कही रख आता !!

हाय ! मनुज तू इतना छोटा
इतना तुच्छ है ग्यान तेरा !

दुसरों को पीड़ा पहुँचाने में
बढ जाता है मान तेरा.!!

और तू मतिहीन यूँ ही बैठे
सोच के क्या कर पाओगे !

अँधा – बहरा यह समाज है
तुम क्या इसे जगाओगे ! !

फिर भी मन कहता की
जगहित में कर लें चिंतन !

हम भी चले राह वही तो
कैसे लक्ष्य सफल होगा !!

मनोज उपाध्याय मतिहीन

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मतिहीन

मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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