फ़सा हुआ हूँ

Home » फ़सा हुआ हूँ

फ़सा हुआ हूँ

मैं क़ातिलों के बीच फ़सा हुआ हूँ
मैं इंसानों के बीच फ़सा हुआ हूँ
मैं रूढ़िवादियों के बीच फ़सा हुआ हूँ
मैं समाज के अंधविश्वास में फ़सा हुआ हूँ

मैं सरकार की नीतियों में फ़सा हुआ हूँ
मैं राजनेताओं की खोखली बातों में फ़सा हुआ हूँ
मैं बेबुनियादी बातों से फ़सा हुआ हूँ
मैं खोखली आदर्शों में फ़सा हुआ हूँ

मैं दरिंदों के बीच फ़सा हुआ हूँ
मैं हत्यारों के बीच फ़सा हुआ हूँ
मैं खून से होली खेलने वालों के बीच फ़सा हूँ
मैं इन जिहादियों के बीच फ़सा हुआ हूँ

मैं धर्म और अधर्म में फ़सा हुआ हूँ
मैं नास्तिक और आस्तिक के बीच फ़सा हुआ हूँ
मैं जाती और मनुष्यों के बीच फ़सा हुआ हूँ
मैं, हूँ “प्रेम” कविराय, क़ातिलों के बीच फ़सा हुआ हूँ

Say something
Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

Leave A Comment

हिन्दी लेखक डॉट कॉम

सोशल मीडिया से जुड़ें ... 
close-link