दम

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दम

By |2018-07-21T11:52:32+00:00July 21st, 2018|Categories: कविता|Tags: , , , |0 Comments

दम है तो समाज में फैलाएं अंधविश्वास से लड़ों।
दम है तो समाज मे फैलाएं कुरीतियों से लड़ों।।

दम है तो रूढ़िवादियों और अंधविश्वासों से लड़ों।
दम है तो समाज फैलाएं जाती और प्रथावों से लड़ों।।

दम है तो अपने अंदर के जानवर से लड़ो।
दम है तो धर्म के ठेकेदारों से लड़ों।।

दम है तो भ्रष्ट सरकार के अपसरों से लड़ों।
दम है तो सरकार के खोखली नीतियों से लड़ों।।

दम है तो गरीब के हक़ में लड़ों।
दम है गरीब को दो वक्त के रोटी के लड़ों।।

दम है शिक्षा व्यवस्था के लड़ो।
दम है तो स्वास्थ्य व्यवस्था के लड़ों।।

दम है तो राजनेताओं से लड़ों।
दम है तो सरकार को नई दिशा प्रदान करों।।

दम है तो समाज को नई दिशा प्रदान करने में लड़ों।
कहें “प्रेम” कविराय, दम है तो इंसान बन के दिखवों।।

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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