मैं ब्रह्म ज्ञान हूँ

मैं रोज़गार ढूँढ रहा नौजवान हूँ।

मैं तो भविष्य देश का हूँ वर्तमान हूँ।।

 

तू पास फ़ैल का न गुणा भाग कर कभी।

घबरा न ज़िन्दगी मैं तेरा इम्तिहान हूँ।।

 

हर वक़्त कीमती है यहाँ जान लो सभी।

मैं आपका समय हूँ सुनो मूल्यवान हूँ।।

 

कुछ काम तो करो न रहो भाग्य कोसते।

दूँगा समय से ही मैं विधि का विधान हूँ।।

 

घबरा न तू कभी न कभी पीठ तू दिखा।

भीतर दबी है देख ज़रा वो उड़ान हूँ।।

 

आ जा शरण में आज मेरे मोह त्याग कर।

ऋषियों का ध्यान हूँ तो कभी वेद ज्ञान हूँ।।

 

झकझोर तो सुधीर तू आवाज़ तो लगा।

आजाऊँगा समक्ष तेरे ब्रह्म ज्ञान हूँ।।

 

– सुधीर बमोला

ऋषिकेश

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Sudhir Bamola

सुधीर बमोला ऋषिकेश उत्तराखंड मैं छंद मुक्त कविताएँ,ग़ज़ल, मुक्तक,दोहे,छंद,लघुकथा आदि लिखता हूँ।

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