कोई वजह तो होगी

यूँ ही नहीं कोई बसता किसी के दिल में
दिल में यूँ बसने की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नही कोई देखता सपने जागती आंखों से
आँखों में सपनों की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं कोई प्यार करता किसी को सिद्दत से
सिद्दत से प्यार करने की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं कोई याद आता किसी को हरपल
हरपल याद आने की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं कोई बेचैन होता किसी के लिए इस कदर से
इस बेचैनी की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नही मिलता कोई ज़िन्दगी के सफर में
सफर में इस मुलाकात की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं कोई बंधता किसी के अनजान रिश्तों से
रिश्तों में बंध जाने की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नही कोई रूठ जाता किसी से पल में
पल में रूठ जाने की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं कोई सुनाता किसी को दर्द दिल के
दिल के दर्द सुनाने की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं कोई मुस्कुराता किसी के साथ होने से
साथ होने पर मुस्कुराने की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं कोई विस्वास करता किसी पे हद से
इस कदर से विश्वास की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं कोई इंतज़ार करता किसी का बेसब्री से
बेसब्री से इंतज़ार की कोई वजह तो होगी
यूँ ही लाखों कमियां हों मुझमें तो क्या परवाह उनकी
मुझपे तेरे विस्वास की कोई वजह तो होगी
यूँ ही नहीं हम बंधे एक दूजे से बिना किसी बंधन के
हमारे इस बन्धन की कोई वजह तो होगी

M S PATEL
13.07.2018

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