बेवफा सनम…

“एक गजल आपकी नजर ”

किश्तों में दे दिया है गम हजार ओ मुझे
कशमकस में कर दिया सरकार ओ मुझे !

हमने बचाई आबरू हर हाल में मतिहीन
पर ला खडा किया सरे बाजार ओ मुझे !!

हमने दिया कुर्बानियाँ उसके लिए इतनी
कि कर नही सकता था इन्कार ओ मुझे !

हमने बिछा दिये नजर सजदे में उसके यार
फिर भी पलट देखा नही एक बार ओ मुझे !!

हम तो मिट गये थे मोहब्बत में ही उसके
पर बेवफा था कर सका ना प्यार ओ मुझे !

हमने हमारी जान तक लिख दी उसी के नाम
पर दे सका ना एक जरा अधिकार ओ मुझे !!

हमने किया था चाँद सितारों की आरजू
क्या बेरहम था दे दिया अंगार ओ मुझे !

डर से अकलेपन के दोस्तों में जो गया
बख्सा सफर तनहाई का संसार ओ मुझे !!

मनोज उपाध्याय मतिहीन

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मतिहीन

मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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