राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
गज़ल/गीतिका
मीटर-222-222-221-2

मेरा भारत सबसे प्यारा लगे।
इसके आगे जग भी हारा लगे।।

नभ के तारे हैं सारे देश ये।
सबमें चंदा-सा ये न्यारा लगे।।

फर-फर फहरे तिरंगा उँचा रहे।
आज़ादी का ये तो नारा लगे।।

छह ऋतुओं का आना-जाना रहे।
हर मौसम गंगा की धारा लगे।।

न्यारी-प्यारी बोली भाषा यहाँ।
सब रंगों का ये तो द्वारा लगे।।

ऋषि-मुनियों की धरती कहते इसे।
चारों वेदों का सिंगारा लगे।।

भारत-भारत जय-जय भारत कहो।
सुनके जिसको दुश्मन मारा लगे।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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