” नारी ” (भाग-१)

उपेक्षित उपहार हूँ मै
उपशम एक उपचार हूँ मै |

निर्जन की संगीत हूँ मैं
खुशियों की अवतार हूँ मैं ||

पी दृगमदिरा मस्त हुआ
मतवाले की उद्गार हूँ मैं |

मैं सृष्टि की हूँ मै रचनाकार
मतिहीन वस्तुत:नारि हूँ मैं ||

#कॉपीराईटमतिहीन
*मनोज उपाध्याय मतिहीन*

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