तुम हो तो, जिंदगी है

तुम हो तो, जिंदगी है
तुम से ही, बन्दगी है

तुमसे क्या है, रूठना
ये तो इक, दिल्लगी है

क्या कहा, तुम्हें मत सोचूँ
मेरी तो ये, तिश्नगी है

इश्क़ करके कैसे भूलूँ
ये मेरे, दिल की लगी है

तुम नहीं, चाँद – सूरज कुछ नहीं
तीरगी बस तीरगी है

तेरा नाम सिमरुं, जैसे दुआ कोई
लोग कहते आवारगी है

अमिता गुप्ता मगोत्रा

(तिश्नगी : तृष्णा , प्यास )
(तीरगी : अंधेरा)

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Amita Gupta Magotra

मैं अमिता गुप्ता मगोत्रा भारत देश में ,मोहाली -पंजाब प्रदेश की रहने वाली हूँ। मुझे कविताएं, कथा,कहानी लिखने का शौक है। विभिन्न किताबों,पत्रिकाओं में मेरी रचनाओं को स्थान मिल चुका है। मेरे पति व बेटी भी लिखते हैं।

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