चपत /थप्पड़

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चपत /थप्पड़

लघु-कथा
चपत /थप्पड़

एक भिखारिन नाबालिग लड़की फटेहाल कपड़ों में सड़क के किनारे बैठ कर आते-जाते लोगों से भीख मांग रही थी कोई उसे दुत्कार के चला जाता ,तो कोई तरस खा के 1-2 सिक्के उसकी झोली में फैंक कर चला जाता . मगर उसे तो बड़ी भूख लगी थी उसका तो यह जी चाह रहा था की उसे कुछ खाने को देदे। पिछले दो दिनों से वो भूखी थी ,और कुछ बीमार भी लग रही थी कमजोरी के मारे उससे बोला भी नहीं जा रहा था। मगर किसी को उसकी इस हालत से कोई सरोकार नहीं था .हां ! अगर था भी तो उसके तार -तार कपड़ो से झांकते नव- यौवन से. विकृत मानसिकता से लबरेज़ घूरती निगाहों का वोह निशाना बनी हुई थी ,वहीँ सभ्रांत महिलायों की आँखों से छलकती नफरत की भी .
उस मजबूर और बेसहारा लड़की की हालत पर तमाशबीन बने लोगों में एक अधेड़ उम्र का शख्स भी वहीँ मौजूद था ,वोह दिखने में कुछ सभ्य , सुशिक्षित और सज्जन लग रहा था . उस लड़की के पास आया ,उसे आँखों से टटोला और धीरे से फुसफुसाते हुए बोल ,” ऐ लड़की! तू यहाँ कब तक बैठी रहेगी ? चल उठ मेरे साथ चल . ” वोह लड़की सवालिया निगाहों से उसकी तरफ दिखने लगी .
” देख क्या रही है ! चल ,हां ! हां ! मैं तुझे कुछ खाने को देता हूँ , तुझे बड़ी भूख लगी है ,है ना !’

वोह मासूम लड़की ख़ुशी से उठ खड़ी हुई और चहकते हुए बोली ,” सच साब जी ! आप मुझे खाने को दोगे ? ”
अधेड़ शख्स ,” हां बाबा हां ! खाना भी और पहनने को कपड़े भी ,मगर तुझे मुझे खुश करना होगा ”

”खुश करना होगा ! कैसे ? अच्छा ! कोई गीत सुनना होगा, और नाच के दिखाना होगा ,है ना ! साब जी मुझे सब आता है, मैं आपके घर का सारा काम भी कर दूंगी , बस कुछ खिला दो ! ”

लड़की ने बड़े भोलेपन से एक मासूम बच्ची की तरह इठलाकर कहा.

” हाँ-हाँ !तू चल तो सही , तुझे सब बताता हूँ ,” अधेड़ आदमी ने उसकी बांह पकडनी चाही. लड़की ने अपनी बांह छुड़ा ली और कहा ,” अच्छा ! ज़रा रुकिए ” इतना कहकर सड़क के दूसरी और बैठे अपने दोस्त को आवाज़ देकर बुलाया और अधेड़ आदमी की सारी बात उसे बता दी. उसका दोस्त अधेड़ आदमी के पास आया अपनी मित्र का हाथ पकड़ लिया और अपने साथ १-२ लोगों को और ले लिया औरअधेड़ आदमी के पास आकर कहा ” चलिए साब ! ” अधेड़ आदमी के हाथों के तोते उड़ गए वोह लड़के और उसकी मित्र की शक्ल की और देखने लगा .लड़के ने फिर कहा ” ऐसे गौर से क्या देख रहे हैं साहब,ऑंखें फाड़-फाड़ के ,हम भी तो भूखे है औरहमारे भी कपडे फटे हुए हैं. जो मेहरबानी आप  इस लड़की पर करना चाहते थे हम पर भी कीजिये न ” म  म मैं क्यों तुम सब पर मेहरबानी करूँ ?” ” मैने ऐसा कुछ नहीं कहा इससे ,मुझे कुछ नहीं करना ,म-म मैं खाली नहीं  बैठा तुम्हारे लिए ,मैने कोई खैरात बाँट रखी है क्या तुम्हारे लिए?” और उनकी तरफ बिना देखे वोह फटाफट अपनी गाडी में जाकर बैठ गया और वहाँ से रफू-चक्कर हो गया.पीछे से सब उसे आवाजें देते रहे और फिर सबके समवेत स्वर में हंसने की आवाज़ आई .वोह ”सभ्य ”आदमी बहुत शर्मसार हुआ ,आखिर तो ऐसा होना ही था   कहाँ तो एक मासूम और मजबूर लड़की की आबरू लुटने आया था, और अपनी ही आबरू लुटा बैठा  .वोह लड़का  उस लड़की की तरह ही एक भिखारी था ,मगर उस मासूम ,गरीब, मजबूर लड़की का उसने ऐसी मुश्किल वक्त में हाथ जो पकड़ा उस लड़की का आत्म-विशवास बढ़ गया और हिम्मत भी . उस लड़के के इस सशक्त कदम से ना केवल वहां मौजूद लोगों को चपत लगी तो लगीबल्कि  उस अधेड़ ,कामी, मक्कार आदमी के मंह पर भी करारी चपत पड़ी. की उसे अपना सा मुंह लेकर भागना पड़ा.इसके पश्चात  श्याम (भिखारी लड़का) और गीता ( भिखारिन बालिका ) ने अपने पास जो भी पैसे थे उनको मिलाकर  पास के ढाबे से वडा -पाँव लेकर खाया और उस अधेड़ आदमी की बातें कर-कर के उसकी खिल्ली उड़ाते हुए खूब हँसे . ऐसे दुष्ट ,पापी ,मक्कार लोगों के साथ ऐसा ही बर्ताव होना चाहिए. यदि हमारे सभ्य  लोगों के समाज में यदि कोई हिम्मती  पुरुष /युवक या जन समुदाय  लड़कियों और महिलाओं की  सुरक्षा एवं सम्मान के लिए  आगे बढ़ेंगे तो निश्चय ही  नारी विषयक अपराधों मे कमी आएगी और नारी अपना जीवन बेखौफ  खुल के जी सकेगी.

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संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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