प्रिये तुम आओ पास मेरे
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प्रिये तुम आओ पास मेरे, मैं बाहों का बंधन दूंगा ।
महक उठेगा तन मन तेरा, मैं प्यार भरा चंदन दूंगा ।
मेरे दिल की बगिया में तुम, आ जाओ बनकर मेहमान ।
सपन सलौने जो आँखों में, पूरे कर जाओ अरमान ।।
कमल पंखुड़ी अधर तुम्हारे, इन अधरों पर चुंबन दूंगा ।
प्रिये तुम आओ पास मेरे, मैं बाहों का बंधन दूंगा ।

तू लगे है पूर्णमासी सी, तू लगे नदी बलखाती सी ।
है अंग अंग में मादकता, तू झड़ी लगे बरसाती सी ।
तू लगे सुबह की बेला है, तू नभ में चाँद अकेला है ।
सुगन्ध से अपनी महकाती, तू लगे फूल अलबेला है ।
इंद्रधनुष के रंगों जैसा, मैं लगा तुझे रंजन दूंगा ।
प्रिये तुम आओ पास मेरे, मैं बाहों का बंधन दूंगा ।

तू लगे घटा मनभावन सी, तू लगे छटा है सावन सी ।
मदमस्त बहे मधुमासी सी, तू पवन बड़ी ही पावन सी ।
हैं नयन बड़े ही मतवाले, ये भरे सुरा के हैं प्याले ।
इन दो नयनोँ के क्या कहने, कहीं मार हमें न ये डालें ।
सुरा भरे तेरे नयनोँ को, मैं प्यार भरा अंजन दूंगा ।
प्रिये तुम आओ पास मेरे, मैं बाहों का बंधन दूंगा ।

तू लगे प्रेम की मूरत सी, तू लगे देव की सूरत सी ।
तू अमर प्रेम की परिभाषा, तू शुभ घड़ी लग्न मुहूर्त सी ।
मुझको तेरी अभिलाषा है, अब मधुर मिलन की आशा है ।
नयनोँ की बातें समझ प्रिये, यह मूक प्रेम की भाषा है ।
तुम मन मंदिर में आ जाओ, मैं शीश झुका वंदन दूंगा ।
प्रिये तुम आओ पास मेरे, मैं बाहों का बंधन दूंगा ।

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