स्वास्थ्यवर्धक दोहे

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स्वास्थ्यवर्धक दोहे

By |2018-08-05T09:39:06+00:00August 5th, 2018|Categories: स्वास्थ्य|0 Comments

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#प्राचीन समय से ही दैनिक जीवन में स्वास्थ्य से जुड़ी लोकोक्तिया या बातें, पुराने चिकित्साविद् इस्तेमाल में लाते रहे हैं। मुहावरों में ही एसी गूढ़ बातें कह दी गई हैं, कि उनको यदि दैनिक प्रयोग में लाया जाय तो कई रोगों से कोसों दूर रहा जा सकता है। ये सारे नुस्खे हालांकि आयुर्वेद के पुराने ग्रन्थों से ही लिए गए हैं, पर घर में बुजुर्गों द्वारा आपस की बोलचाल में मुहावरों (कविताई ढंग) से बता दिया करते थे।

#पेट को रखो नरम,पैर को रखो गरम।
सिर को रखो ठंडा, यही है सेहत का फंडा।

#नींबू आधा काटिये, सेंधा नमक मिलाय
भोजन प्रथमहि चूसिये,अजीर्णता मिट जाय।

#पीवै मट्ठा, है जाये लट्ठा।

#भोर ही मठा पियत है, जीरा नमक मिलाय,
बल और बुद्धि बढ़त है, सबै रोग जरि जाय।

#जैसे कम खाना गम खाना ,
डॉक्टर वकील के पास क्यों जाना।

#गांधीजी ने भी कहा है। धैर्य के लिए आज भी यह शतप्रतिशत सही है।
कम खाना और गम खाना, दो बड़े ये योग,
गम खाये बैरी(शत्रुता)कटै, कम खाये तन रोग।।

#रोग की जड़ खांसी,
झगड़े की जड़ हांसी।

भोजन के तुरन्त बाद तेजी से न चलने के लिए, सहज तरीके से बताया गया है।
#खाके जल्दी चलिए कोस,
मरिये आप, देव को दोष।

#एक बार खाये योगी, दो बार खाये भोगी,
और बार बार खाये रोगी।

#अन्न ही तारे, अन्न ही मारे।

अर्थात संतुलित भोजन ही मनुष्य को जिन्दा रखता है, और असंतुलित भोजन ही मनुष्य के रोग का कारण बनता है।संतुलित आहार के लिए बुजुर्गों ने कहा है।
#कभी घी घना, कभी मुट्ठी चना,
और कभी वह भी मना।
#खाये चना, रहे बना।

#घी दूध खाय के खोपड़ी,
भुला दे सबकी हेकड़ी।

#हरड़,बहेड़ा आंवला,घी शक्कर में खाय,
हाथी दाबे कांख में,साठ कोस ले जाय।

जो नियमित तौर पर सुबह त्रिफला का सेवन घी, शक्कर या शहद के साथ करता है, वह अति शक्तिशाली बन जाता है।

दांत की मजबूती और सवेरे जल के महत्व के लिए कहा है।
#मोटी दातुन जो करे,नित उठ हरड़ खाय,
बासी पानी जो पिए,ता घर वैद्य न जाय।

#अधिक गर्म जो पेय पिए,अथवा भोजन खाय,
वृद्धावस्था के प्रथम,बत्तीसी झड़ जाय।

#फल या मीठा खाय के,तुरत ना पीवै नीर,
ये सब छोटी आंत में बनते विषधर तीर।

#जब तक दांत, तब तक आंत।
#घूंट घूंट पानी पियें, रहें तनाव से दूर,
एसीडिटी, या मोटापा होवे चकनाचूर।

#वात रोग या हर्निया,अपेंडिक्स का त्रास,
पानी पीजे बैठ कर, कभी ना आवे पास।

#प्रातः कल पानी पियें, घूंट घूंट कर आप,
बस दो तीन गिलास है हर औषधि का बाप।

#जो नित आंवला खात है, प्रातः पियत पानी,
कबहुँ न मिलिहे वैद्य से,कबहुँ न जय जवानी।

#देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल,
अपच,आँख के रोग,तन भी रहे निढ़ाल।

#नित भोजन के अंत में,तोला भर गुड़ खाय,
अपच मिटे ,भोजन पचे,कब्जियत मिट जाय।

#भोजन करके खाइये,सौंफ,गुड़,अजवायन,
पत्थर भी पच जायगा,जाने सकल जहान।

#फल या मीठा खाय के,तुरत न पीजे नीर,
ये सब छोटी आंत में बनते विषधर तीर।

#घी, अलसी,नारियल,तिल, सरसों का तेल,
यही खाइये नहीं तो दिल समझिए फेल।

#चोकर खाने से सदा बढ़ती तन की शक्ति,
गेंहू मोटा पीसिये,दिल में बढ़े विरक्ति।

#रोज मुलहठी चूसिये,कफ बाहर आ जाये,
बने सुरीला कण्ठ भी,सबको लगत सुहाय।

#अल्युमिनम के पात्र का करता जो उपयोग,
आमन्त्रित करता सदा, वह कई तरह के रोग।

#जाऊँ कि ना जाऊँ, जाना ही उचित,
खाऊं कि ना खाऊं,ना खाना ही उचित।

#अर्थात शौच जाने पर मन में दुविधा हो,तो जाना ही चाहिए। तथा भोजन की मन में दुविधा हो तो न खाना ही उचित है।

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