ज़िन्दगी गुजार दूँ…

“गजल”

आजा कि तेरी बिखरी जूल्फे संवार दूँ
दो जहाँ की खुशियाँ मै तुझपे वार दूँ |

तरशा है बहुत दिल तुझे पाने के वास्ते
अब दिल में है तुझे जी भर के प्यार दूँ||

कहते खिजा मुझको है तेरेे शहर के लोग
मैं हूँ हवा गुलशन में हर मै ही बहार दूँ |

तुम पर मिटा हूँ जाने तमन्ना इसी लिये
आजा कि जिन्दगी जरा तुझसे उधार लूँ ||

छोडो ये दुनियां वाले दुश्मन है मोहब्बत के
दुनियां से आ छुपाकर दिल में उतार लूँ |

मुद्दत से आरजू यही दिल में मेरे दिलवर
तेरे साथ हमसफर ये जिन्दगी गुजार दूँ ||

मनोज उपाध्याय मतिहीन

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मतिहीन

मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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