तौबा !यह काम वालियां ( मेहरी)

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तौबा !यह काम वालियां ( मेहरी)

तौबा ! यह काम वालियां (मेहरी / house-made)

जब  ना   आये   वोह  काम पर ,

तो   हम पर   आ जाती   आफत ,

मगर   जब   आ जाये  वोह  ,

तो चेहरे  की बढ़  जाती है  रौनक .

वोह  समझती   है  की   मैडम का ,

हाल  बहुत   अच्छा   है .

उसे   क्या   पता   की   उसके  ,

आने से  पहले   हमने  उसे  कितना कोसा  है..

”  अभी तक  नहीं   आई  महारानी !,

कहीं  फिर छुट्टी  ना कर ले .

कहीं कोई उसका अपना  ,

गुज़र ना जाए .

या  कोई बीमार  ना हो  जाये .

हम बीमार हो जाये बेशक, चलेगा !

हे भगवान  ! कहीं वह खुद ,

बीमार न हो जाये .

या यूँ ही ! कहीं  नया कोई

छुट्टी  का बहाना ना बना ले.

किसी की शादी ,किसी का मुंडन ,

या किसी क रोका ,

उसका  क्या  है !  उसके  पास ,

तैयार   रहती   है  कोई न कोई  कहानी।

आज   पति  से हो गयी  लड़ाई ,

या सास   से हो गयी  बद -ज़बानी।

सूजा  हुआ   सा  मुंह ,

और आँखों  में  आंसू लिए।

और   कभी   यूँ ही   उदासी  की ,

चादर  सर पर    ओढ़े  हुए।

दिखाते   हुए  लाचारी।

उसे   देख कर हमारी  मानवता ,

कह उठती  है  ”बेचारी ”.

पहले   तो मुंह   से निकलती है , हाय !

फिर  उसे परोसी  जाती है गर्मागर्म चाय ,

और फिर पूछा जाता है ,”और कुछ खाएगी बिटिया !

पहले जिसे करना चाहते थे काम से  बाहर ,

अब वह बन  जाए  सहारा।

निचोड़  लेती है  हमारी  सभी  सहानुभूतियां ,

जिससे करना चाहते थे किनारा।

सच  मानो तो यह  हमसे  ज़ायदा  ,

होती है  सामाजित प्राणी।

हर दिल  को  वश करने माहिर ,

और चलती -फिरती आकाशवाणी।

है  तो  वो  अंगूठा -छाप , मगर

उसके   सामान्य -ज्ञान की  मत पुछिये.

किस गली ,शहर ,या  देश  में क्या हुआ ,

जो   चाहे  पूछ लीजिए.

इसके आने  से  घर की ,

कायापलट  हो जाये।

जो काम  लगते थे  भारी ,

वह  एक क्षणमें  निपट  जाये.

अब काम की quality मत पूछिये ,

काम हो गया बस ! इतने में संतोष  कर लीजिये .

वह   ना आये   तो   एक मेहमान  भी  ,

बोझ लगता है।

और यदि वह आ  जाए काम पर तो ,

फिर आ जाये घर पर बेशक कुनबा का कुनबा ,

हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है .

” कोई बात नहीं ,है ना !

सब कर लेगी !”

और यदि वोह ना आये तो ..

”हाय ! आज तो मेरी जान निकल जाएगी !”

वह चाहे  जैसी भी  हो ,

हमारे  मन को  भाये।

हम  पर चाहे  जो गुज़रे ,

मगर उसपर  कोई आंच ना आये ,

यही दुआ  करता है  हमेशा दिल.

देख कर  जिसे कह   उठता है

” आप क्या आई ,बहार आ गयी ”

 

 

 

 

 

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संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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