इंसान और इंसान

इंसान और इंसान

By |2018-08-09T00:18:18+00:00August 8th, 2018|Categories: कविता, व्यंग्य|0 Comments

इंसान को इंसान को सहयोग करेगा
जो भी करेगा उसका क़िसमत करेगा

मेरा दोस्त ही मेरा क़ातिल है
मेरा दोस्त ही मेरा हमदम है
मेरा दोस्त ही मेरा कत्ल किया
वो हमें क्या इंसाफ देगा?

ज़िन्दगी को बहुत करीब से देखा
मैं खुद का चेहरा मुझे खुद रूला देगा
इंसान इंसान को सहयोग करेगा
जो भी करेगा उसका क़िसमत करेगा

कुछ ना पूछो दोस्ती का सिला
मेरे हमदम ने मुझे हिला दिया
इंसान इंसान को सहयोग करेगा
जो भी करेगा उसका क़िसमत करेगा

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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