अफसुर्दगी की कहानी।

अफसुर्दगी की कहानी।

By |2018-08-08T21:02:07+00:00August 8th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , |0 Comments

एक नई गजल :-

समन्दर के लबों पर तिष्नगी है।
मुझे इस बात की अफसुर्दगी है।।

वहाँ अपनी भलाई देख लेते।
जहाँ मौजूद तेरी बन्दगी है।।

चमक फीकी कभी होती नहीं है।
अगर जलवों में तेरी सादगी है।।

तेरी मंजिल तेरे कदमों में होगी।
अगर उसके लिए दीवानगी है।।

अलग – अलग दिखाई देती है।
हमारी आप की जो बानगी है।।

तमाम फूल जिसने तोड़ डाले।
उसके चेहरे पे कैसे ताजगी है।।
**जयराम राय **

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