चाँद भी फीका लगे

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चाँद भी फीका लगे

By |2018-08-08T21:03:13+00:00August 8th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

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बात मीठी तेरी हँसना खिलता गुलाब है।
चाँद भी फीका लगता निखरा यूँ शबाब है।।

है घटा सावन की बल खाता ये बदन तेरा।
देख नाचे है तुझको बनके मोर मन मेरा।
दिल हुआ है दीवाना तेरा क्या ज़वाब है।
चाँद भी फीका लगता निखरा यूँ शबाब है।।

चाल नूरानी मस्ती भरती हर अदा तेरी।
तू मुझे मिल जाए मालिक से है दुवा मेरी।
तू अगर रानी मेरी बंदा खुद नवाब है।
चाँद भी फीका लगता निखरा यूँ शबाब है।।

प्यार की नदियाँ बहती आँखों के शहर भरी।
दिल हुआ सागर मेरा तुझपे जो नज़र पड़ी।
बस तुझे देखूँ चाहूँ सजता आज ख़्वाब है।
चाँद भी फीका लगता निखरा यूँ शबाब है।।

हम वफ़ा का गुलशन आओ मिलके बने सनम।
हम सफ़र बनके इश्क़े-मंज़िल तय करें सनम।
प्यार नज़राना होता सुनिए लाज़वाब है।
चाँद भी फीका लगता निखरा यूँ शबाब है।।

बात मीठी तेरी हँसना खिलता गुलाब है।
चाँद भी फीका लगता निखरा यूँ शबाब है।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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About the Author:

राधेयश्याम प्रीतम पिता का नाम श्री रामकुमार, माता का नाम श्री मती किताबो देवी जन्म स्थान जमालपुर, ज़िला भिवानी(हरियाणा)

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