आया सावन झूम के

आया सावन झूम के

By |2018-08-11T00:57:34+00:00August 11th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

आया सावन झूम के

आपकी चाहत, आपकी मदहोशी ख़ुशबू लाए हैं।
संदियों के बाद आया सावन झूम के छाए हैं।

आपका सन्देश आया जब
मैं झूम उठा बहें पुरवाई
हल्की हल्की बून्दें ने छेड़ी तराना
आयी मिलन कि रूट बेला
घर आंगन में ताज़ा हुआ उनके मदहोश खुशबू की काया।

मन मे हुआ हलचल
मन मे चितचोर छिड़े
मन करे हिलोर तन मन
मन की प्यारी करत हिचकोर
मन मिट संग नाचे जिया जब आया सावन झूम के।

हल्की हल्की फुहारे की छमछम
और अंधेरी रातों में तन्हाई का दौर
मेरा चैन वैन ले उड़ी मन का
किसने दस्तक दी इस दिल को
मन कहता है उनसे आँखें मिलने को भिगोएं है।

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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