सच्ची प्रीत (मिट्टी और पेड़)

प्रीत करो तो ऐसी जैसी मिट्टी और पेड़
हैं दोनो के कर्म जुदा तो क्या
संग दोनों के बिना नही कीमत इनकी कोई
गर दोनों मिल जायेँ नया सवेरा लाते हैं
भरी मुलायम मिट्टी होती
पेड़ से होती शीतल छाया
जो हो जाए साथ जुदा इन दोनों का
तो खत्म हो जाता है दोनो का मोल
मिट्टी हो जाती बंजर, पेड़ तो जाए सूख।
मानव जीवन की भी यही कहानी है
नर-नारी की प्रीत है मिट्टी- पेड़ की जैसी
नारी से नर है नर से नारी की परिभाषा
दोनों के धर्म जुदा हैं दोनों के कर्म जुदा
एक है जीवनदायी तो एक छाया है
जो नारी घर है तो नर है संसार
कहे सबसे एक बात “सुबोध”
अनमोल बहुत है प्रेम का रिस्ता
प्रेम के रिस्ते को नही देना तुम तोड़
बिन एक दूजे के नहीं इनका कोई मोल

अब भी वक़्त है मानो बात हमार
प्रीत करो तुम ऐसी जैसी मिट्टी और पेड़

M S PATEL

 

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