बरसात भाग-दूसरा

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बरसात भाग-दूसरा

By |2018-08-15T12:42:09+00:00August 15th, 2018|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

बरसात भाग-दूसरा

बहुत तेज बरसात होगी
आ जाएगा बाढ़ चारों तरफ
दर-बदर अस्त-व्यस्त हो जाएंगे जन-जीवन
घरों की दीवारें में बाढ़ का पानी-ही-पानी होगा
मेरे प्रियतम तब तुम्हें ये देख कर अच्छा लगेगा!

तुम हो शाहजादी महलों में रहने वाली
वहाँ हर रोज बरसात हो भी तो तुम्हें
ज्यादा प्रभाव नही पड़ता लेकिन जहाँ
हमलोग जैसे इंसान का मेहनत बेकार चला जायेगा
बहुत बरसात का मतलअच्छी फसलों का नष्ट होना
हमलोग के कच्चा मकान के घरौंदे गिरना तय हैं

शायद तुमनें गाँव देखे भी नहीं होगें
तुमनें वहाँ के जीवन का स्वाद चखा भी न हो
बहुत कठिन जीवन होता है प्रियतम तुम क्या जानो
ए बाढ़ का पानी न जाने क्या-क्या बहा ले जाता हैं!
प्रेम प्रकाश
14/08/2018

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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