सह रहे थे जुर्म सदियों से अपने ही घर में जीना दूभर हो गया
अत्याचारों का नहीं कोई अंत था हर इंसान गुलाम हो गया
भगत सिंह जैसे कितने देश भक्तों को फाँसी पर लटका दिया
जलियांवाला बाग में ना जाने कितना रक्त बहा दिया

जल रहा था हर दिल में सिर्फ़ एक ही अंगारा
आज़ादी चाहिए बस यही था हमारा नारा
अनगिनत कुर्बानियों के बाद देश आज़ाद हो गया
हिन्द को आज़ाद हिंदुस्तान का दर्जा मिल गया

स्वर्णिम अक्षरों से इतिहास के पन्नों में यह लिखा गया
मिल गई आज़ादी लेकिन कद्र करना नहीं आया
कोई भी आज़ादी का सही मतलब समझ नहीं पाया
ख़ुशियाँ मिलने से पहले ही ग़म का बादल छा गया

हर इंसान के मन में एक अलग आज़ादी का मोह घर कर गया
इसीलिए इतने वर्ष बाद भी सच पूछो तो देश आज़ाद ना हो पाया

किसी ने अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर गुमराह किया
किसी ने लोकतंत्र के नाम पर बर्बादी का पैगाम दिया
किसी ने बसों को जलाया किसी ने लिंचिंग को अंजाम दिया और
किसी ने जातिवाद का फायदा उठाया किसी ने दंगों को भड़काया
राजनीति के नाम पर अपना उल्लू सीधा करना ही सबको भाया

शहीद हो गए वह जिन्होंने आज़ादी को हासिल किया
अपना सब कुछ आज़ादी की ख़ातिर ही कुर्बान किया
आत्मा पर उनकी प्रहार हर रोज़ होता है
यहाँ तक कि तिरंगे का अपमान भी कई बार होता है
उठ ना खड़े होंगे राष्ट्रध्वज की आन में
यह ख़्याल भी सरे आम होता है

काश आज भी देश वासी संभल जाएं
राजनीति भी देश हित में करी जाए
तभी असल मायनों में देश आज़ाद होगा
जब हर देशवासी के दिल में भगत सिंह ,सुखदेव और
राज गुरु जैसा प्यार देश के लिए उमड़ रहा होगा

आज़ादी की कीमत हर दिल में उठनी चाहिए
पक्ष हो या विपक्ष सभी को इसका मूल्य समझना चाहिए
और देश हित के लिए पूरे देश की एक ही आवाज़ होना चाहिए
तभी देश असल मायनों में आज़ाद होगा

-रत्ना पांडे

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