बगावत का बस यही अंजाम हो जाए

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बगावत का बस यही अंजाम हो जाए

By |2018-08-16T06:34:30+00:00August 16th, 2018|Categories: कविता|Tags: , |0 Comments

जुर्म जब हद से बढ़ जाए ,बगावत हो ही जाती है
पाने के लिए अपने अधिकार ,बगावत हो ही जाती है
आ जाती है जब हिम्मत ,बगावत हो ही जाती है
बगावत नाम है उसका जो हमें हमारा हक़ दिलाती है

एक बगावत अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ हिन्द में छाई थी
लग गए वर्ष कई फिर भी हिम्मत ना हार पाई थी
अंग्रेज़ों को भारत छोड़ो की बात समझ में आई थी
और उसी बगावत के दम पर ही हमने आज़ादी पाई थी

आज़ादी मिली किंतु धीरे धीरे स्वार्थ की दीमक उसमें लग गई
इसलिए कुछ जवाबदारी हम सब की भी हो जाती है
देश के अंदर एक बगावत की शुरुआत करें
लोभ मोह की कुर्सियों को अपने हक़ से बिलकुल साफ़ करें

लग गई दीमक यदि स्वार्थ और भ्रष्टाचार की
फिर कोई ना बचा पाएगा हस्ती हिंदुस्तान की
आओ एक बगावत देश की भलाई के नाम करें
और स्वार्थ लोभ मोह और भ्रष्टाचार की दीमक साफ़ करें

है लोकतंत्र हमारा हर हाथ में तीर कमान है
तीर ऐसी जगह पर दागो निशाना लक्ष्य पर लग जाए
हराकर स्वार्थ को ,निस्वार्थ को जीत मिल जाए
और इस बगावत का बस यही अंजाम हो जाए

-रत्ना पांडे

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