विदेश में पढ़ाई

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विदेश में पढ़ाई

विदेश में पढ़ाई
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माँ हर पल- हर क्षण
तेरी कमी खलती है।
जीवन की गाड़ी
रोते-रोते चलती है।
ज़िद के पंखों सा पसर गया था।
चमक-दमक ने असर किया था।
ना मैंने तुझ पे तरस किया था।
अब तंग हाली में शाम ढलती है।
माँ हर पल-हर क्षण
तेरी कमी खलती है ।
जीवन की गाड़ी
रोते-रोते चलती है।
**********
जमा पूंजी सब ले आया।
छांव भी तेरी छीन लाया।
पेट न अपना भर पाया।
अब पछतावे की धूनी जलती है।
माँ हर पल-हर क्षण
तेरी कमी खलती है ।
जीवन की गाड़ी
रोते-रोते चलती है ।
*********
विदेश में अभी जिंदा हूँ ।
सड़कों का परिंदा हूँ ।
खुद से बहुत शर्मिंदा हूँ ।
यह मेरी सारी गलती है।
माँ हर पल-हर क्षण
तेरी कमी खलती है ।
जीवन की गाड़ी
रोते-रोते चलती है।
********
इज्जत का मारा पड़ा हुआ हूँ ।
रोटी का टुकड़ा सड़ा हुआ हूँ ।
खुद को संभाले खड़ा हुआ हूँ ।
ना-उम्मीदी मुख पे कालिख मलती है ।
माँ हर पल-हर क्षण
तेरी कमी खलती है ।
जीवन की गाड़ी
रोते-रोते चलती है ।
*******।।मुक्ता शर्मा ।।**

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About the Author:

सरकारी स्कूल में हिन्दी अध्यापक के पद पर कार्यरत,कालेज के समय से विचारों को संगठित कर प्रस्तुत करने की कोशिश में जुटी हुई , एक तुच्छ सी कवयित्री,हिन्दी भाषा की सेवा मे योगदान देने की कोशिश करती हुई ।

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