हाथ मलते है.. .

*गजल…*

*हाथ मलते है…*

*वो कहते हम भीड़ बनाकर चलते है*
*हम तनहाई मे जलते और उबलते है !!*

*वो हमको अपना कहते है फिर भी*
*हमको लगता हम धोके मे पलते है !!*

*दोस्त चलते है हजारों कारवां मे पीछे*
*जाने क्यों लगता वो मुझको छलते है !*

*प्यार के बदले मे कैसे नफरत करते*
*क्या जाने वो किस सांचे मे ढलते है!!*

*सहम सहम हम जीते रहते मर मर*
*पर जाने कैसे वो नही दहलते है !*

*देख के गिरगिट भी इनको शरमा जाए*
*इस तरहा रह रह कर रंग बदलते है !!*

*ऐसे तो चुपचाप रहा करते बिल मे*
*देख के अवसर ये बाहर निकलते है !*

*मै मतिहीन हूँ इसी लिए ज़िंदा शायद*
*मरे हुए ये लोग मुझे ही खलते है!!*

*देख माल औरों का बहुत दुःखित होते*
*उसको पा जाने को सदा मचलते है !*

*हाथ लग गया तो फिर जश्न मनाते है*
*नही लगा जो हाथ हाथ वो मलते है !!*

*मनोज उपाध्याय मतिहीन*

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मतिहीन

मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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