अँतर धून्ही…

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अँतर धून्ही…

By |2018-08-19T06:17:14+00:00August 19th, 2018|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

*अंतर धून्ही*

*अधूरे सत्य को तुम जानते हो*
*मुझे अब तक नही पहचानते हो |*

*निमित्त तेरे ही तो मतिहीन बना*
*मुझे किंचित न अपना मानते हो ||*

*शशि दिनकर से है मैत्री हमारी*
*कहो क्यों रार मुझसे ठानते हो !*

*तेरे अंतर में चलता धूँध हूँ मैं*
*मुझे ही छोड़ते संधानते हो ||*

*मनोज उपाध्याय मतिहीन*

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मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

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