बरसात भाग-चार

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बरसात भाग-चार

बरसात भाग-चार

बहुत खुश होता हूँ
जब-जब बरसात होती हैं
वन और जंगलों में भीगती हुई
जड़ी-बूटियों से सुगंधित खुश्बू
उड़ती हैं और सारे जंगलों में फैल जाती हैं!

हिरण का एक झुंड वृक्ष के नीचे
ठंड से ख़ामोश हुआ शांत खड़ा रहता है
प्रियतम क्या तुम उसे जानती हो!

तुम्हें मालूम है वों अभागा स्वयं मैं हूँ
संसार का काला सच एक मनुष्य हैं
धरती की हरियारी में खुद को संगीत के
माध्यम से गीत सुनने आया हूँ मनुष्य!

मेरी प्रिय प्रियतम मुझे
इस घनघोर बरसात में
एक गीत सुनाओगी
मेरी प्राणप्रिय!
-प्रेम प्रकाश
18/08/2018

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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